Girls B.Ed. ColegeRBKSTeachers Training College Rajasthan
Class Room
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B Ed College Rajasthan
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वार्षिक शैक्षणिक आयोजन :
मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक गतिविधियों का वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है। अब तक महाविद्यालय मंे निम्न शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया गया।

माइक्रो टीचिंग : महाविद्यालय में प्रशिक्षण प्रापत करने वाली सभी छात्राध्यापिकाओं को निम्न ५ शिक्षण कौशलों का विकास कराया गया है जो प्रमुख है - प्रस्तावना कौशल, प्रश्न सहजता कौशल, व्याख्या कौशल, उद्यीपन कौशल तथा दृष्टान्त कौशल। इन क्षमताओं का विकास करने हेतु छात्रा अध्यापिकाओं ने २० दिन तक महाविद्यालय में ही अध्ययन का कार्य किया।

अध्यापन अभ्यास प्रथम चरण : इसमें छात्राओं को झाडोल तथा झाडोल के आसपास के गाँवों में स्थित विद्यालयों में जाकर १७ दिन तक अध्यापन कार्य किया तथा ३ दिन अध्यापन समालोचन में व्यतीत किये।

अध्यापन अभ्यास द्वितीय चरण : यह कार्य भी २० दिन तक चला जिसमें १७ दिन अध्यापन तथा ३ दिन अध्यापन समालोचना में व्यतीत किये गये।

ब्लॉक प्रेक्टिस टीचिंग : ब्लॉक टीचिंग के लिये छात्राआंे को विभिन्न समूहों में विभाजित कर गोदाणा, गोगला, बदराणा, खाखड़, मगवास, दमाणा, खेरवाड़ा, गोराणा, बीड़ा, ढीमड़ी आदि गांवों के विद्यालयों में जाकर ब्लॉक टीचिंग का काम सम्पादित करवाया गया।
ब्लॉक प्रेक्टिस समालोचना : इस कार्य में ३ दिन व्यतीत किये गये।

वनशाला : बी.एड़. के पाठ्यक्रम में वनशाला का आयोजन करना महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम दिनांक १४.१२.०७ से १९.१२.०७ तक आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत सादड़ी जिला पाली में ७ दिन का शिविर आयोजित कर आसपास के गाँवों का सामाजिक, आर्थिक व ऐतिहासिक सर्वेक्षण करवाया गया। छात्राओं को विभिन्न समूहों में विभक्त कर अध्ययन से सम्बन्धित विषयों का गह अध्ययन करवाया गया और प्रत्येक समूह से सम्बन्धित अध्ययन का प्रतिवेदन तेयार करवाया गया। इस क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का भी अध्ययन करवाया गा। इस क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का भी अध्ययन करवाया गया जिसमें प्रमुख रूप से रणकपुर मन्दिर, परशुराम महादेव, कुम्भलगढ, चारभुजा, राजसमन्द झील, नाथद्वारा, एकलिंगजी, माउन्ट आबू इत्यादि प्रमुख है। सभी प्रकार के अध्ययनों के आधार पर वन शाला शिविर का एक समग्र प्रतिवेदन तैयार किया गया। यह शिविर छात्राओं के लिए अविस्मरणीय रहा।
आन्तरिक मूल्यांकन : छात्राओं के अध्ययन उपलब्धि का आन्तरिक मूल्यांकन करने हेतु प्रत्येक विषय अध्यापक मासिक परीक्षा लेकर उनमें विषय से संबधित मूल्यांकन करते है, साथ ही अर्द्धवार्षिक परीक्षा का आयोजन २८.१.२००८ से ७.२.२००८ तक किया गया। इस अर्द्धवार्षिक परीक्षा में सभी छात्राओं ने भाग लिया।

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